KOI NAHI HAI KAHIN-
"इंद्र,आरती को उसके माज़ी से निकालना चाहता था
लेकिन वो मुड मुड कर
अंधी आँखों से
अंधेरा माज़ी टटोलति थी
इंद्र की आवाज़ में उसे
शून्यता ही शून्यता सुनाई देती थी..."
कोई नही है कहीं............
[अलाप....]
कोई नही है कहीं..
कोई नही है कहीं..
कोई नहि....कोइ नही
कोई नही है कहीं
सपनो में क्यूं खो गयी रे
सपनो में क्यूं खो गयी
बोलो न....बोलो ना...
कोई नही है कहीं
फिर आँख नाम हो गयी.....
[आलाप]
फिर आँख नाम हो गयी
फिर कोई याद आ गया है
रोशनी कम हो गयी...
फिर आँख नाम हो गयी
फिर कोई याद आ गया है
रोशनी कम हो गयी...
किनारा मिलेगा यहीं रे
मिलेगा किनारा यहीं
यहीं रे यहीं रे
कोई नही है कहीं....
...कोई नही है कहीं
बात थी ख्वाब की
[आलाप]
बात थी ख्वाब की
ख्वाब में ही.....
..बीत चुकी है
ख्वाब दोहेराते नही
बात थी ख्वाब की
ख्वाब में ही.....
..बीत चुकी है
ख्वाब दोहेराते नही
ज़िंदगी सपना नही रे
ज़िंदगी सपना नही
नही रे..... नही रे.....
कोई नही है कहीं
कोई नही है कहीं
कोई नहि.....कोइ नही...
कोई नही है कहीं
कोई नही है कहीं
A b'ful song with such a b'ful and amzing dance of Hema ji, b'fully b'ful.
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ABKE NA SAAWAN BARSE-
" तालियो के उस शोर में
एक गुम सूम ख़ामोशी भी थी,
एक ऐसी ख़ामोशी,
जो घटाओं के बरेसने से पेहले सुनाई देती है,
और आरती की छलकी हुई आँखों में,
वो ख़ामोशी कुछ यूँ ठहर गयी थी,
जैसे केह रही हो,
अबके ना सावन बरसे,
अबके बरस तो बरसेंगी अँखियाँ,
अबके ना सावन बरसे."
अबके ना सावन बरसे
अबके बरस तो बरसेंगी अँखियाँ
अबके ना सावन बरसे
जाने कैसे अबके येह मौसम बीते
[अलाप]
जाने कैसे अबके येह मौसम बीते
बीते भी जो तेरे बीन वो कम बीते
तेरे बिना सावन सूने
तेरे बिना अब तो येह मन तरसे
अबके ना सावन बरसे
अबके बरस तो बरसेंगी अँखियाँ
अबके ना सावन बरसे........
जाने कब आए दिन, दिन ढल जाए
दिन ढल जाअए
जाने कब आए दिन , दिन ढल जाए
तेरे बिना अँखियों से रात ना जाए
तेरे बिना रात ना जाए
तेरे बिना अब तो येह दिन तरसे
अबके ना सावन बरसे
अबके बरस तो बरसेंगी अँखियाँ
अबके ना सावन बरसे.........
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Meethe Bol Bole Paayaliya-
"सोते जागते
उस ही ख्वाब की आवाज़
चंदन के कानो में भी गूँजती रही
वो अपने ख्वाब
आरती की पायल से लपेटता रहा
और सुनता रहा"
मीठे बोल बोले पायलिया
बोले पायलिया
छूम छनन बोले
झनक झन बोले
मीठे बोल बोले पायलिया
बोले पायलिया
पग पग नाचे रे
[आलाप]
पग पग नाचे रे
घूंघरू की दासी
एक पग राधा जैसी
एक पग मीरा जैसी
सांवरे की बोली बोले पायलिया
मीठे बोल बोले
बोले पायलिया
छूम छनन बोले
झनक झन बोले
मीठे बोल बोले
बोले पायलिया
नैनो की बाँसुरी
सा ग म ध.. म ध नी.. ध नी सा ..
नैनो की बाँसुरी
कोई सुनाए
अँखियों की ज्योति से
ज्योति जलाए
अँखियों की ज्योति से
ज्योति जलाए रे
बाँवरी सी डोले
डोले पायलिया
मीठे बोल बोले
बोले पायलिया
छूम छनन बोले
झनक झन बोले
मीठे बोल बोले
बोले पायलिया
मीठे बोल बोले
बोले पायलिया
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ek hi khwaab
"एक ख्वाब था
और उस ख्वाब की आवाज़ थी
आरती उस ख्वाब की उंगली पकड़े
लंबे बोहत लंबे ख्वाब में
सफ़र कर रही थी
एक ही ख्वाब कई बार देखा है मैने"
एक ही ख्वाब
कई बार देखा है मैने
तूने सारी में
उरस ली हैं
मेरी चाबियाँ घर की
और चली आई है
बस यूँही
मेरा हाथ पकड़ के
मेज़ पर फूल
सजाते हुए
देखा है कई बार
और बिस्तर से
कई बार
जगाए है तुझको
चलते फिरते
तेरे कदमो की वो
आहट भी सुनी है
"क्यूं चीटठी है या कविता ? "
"अभी तक तो कविता है "
"ला ला.....ला ला ......... हमम्म्म.."
गुन गुनती हुई
निकली है
नहा कर जब भी
और
अपने भीगे हुए बालो से
टपकता पानी
मेरे चेहरे पे छिटक देती है
तू टीकू की बच्ची.......
ताश के पत्तो पे
लड़ती है
कभी खेल में मुझसे
और कभी लड़ती भी ऐसे
के बस
खेल रही हो मुझसे
"और आगोश में नन्हे को लिए...."
"...विल यू शटाप ? "\
"और जानती हो टीकू
जब तुम्हारा येह ख्वाब देखा था..........-"
अपने बिस्तर पे
में उस वक़्त पड़ा जाग रहा था...!
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Jaane kya soch kar nahi guzera-
"कभी ज़िंदगी एक पल में गुज़र जाती है
कभी ज़िंदगी भर एक पल नही गुज़रता
इंद्र की ज़िंदगी में भी
एक ऐसा ही पल रुक गया था
जिसे वो आरती के नाम से पेह्चान सकता था
रात गुज़र रही थी,
लेकिन वो एक पल
सारी रात पर भारी था
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा, एक पल रात भर नही गुज़रा"
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
एक पल रात भर नही गुज़रा
अपनी तन्हाई का
औरो से ना शिकवा करना
तुम अकेले ही नही हो
सभी अकेले हैं
येह अकेला सफ़र नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
दो घड़ी जीने की मोहलत
तो मिली है सबको
तुम भी मिल जाओ
घड़ी भर को
येह गम होता है
एक घड़ी का सफ़र नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
एक पल रात भर नही गुज़रा
Wednesday, September 19, 2007
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1 comments:
Nice job ..
मैं गुलज़ार जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ ...वो सबसे बेहतर हैं
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
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